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शुक्रवार, 12 जून 2020

चीन ने पहली बार अपनी परंपरागत दवाओं की लिस्ट से पैंगोलिन का नाम हटाया, दुनियाभर में सबसे ज्यादा तस्करी इसी की होती है

कोरोनावायरस के सोर्स का अब तक कोई पता नहीं चला है, लेकिन चीन ने लगभगमान लिया है कि पैंगोलिन से नए वायरस का कोई न कोई कनेक्शन जरूर है। इसीलिए करीब छह महीने के इंतजार के बाद बड़ा कदम उठाते हुए चीन ने अपनी परंपरागत उपचार वाली दवाओं की लिस्टसे पैंगोलिन का नाम हटा दिया है।

चीन के हेल्थ टाइम्स न्यूज़ पेपर के मुताबिक़, चीन का यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब तमाम वेट मार्केट पर सरकार सख्ती कर रही है। चीन में कोरोनावायरस महामारी फैलने में वुहान लैब की संदिग्ध भूमिका को लेकर ऐसे बाजारों में जिंदाजंगली जानवरों की बिक्री पर कुछ हद तक रोक लगाई है, लेकिन यह पहली बार है जब परंपरागत दवाओं की लिस्टसे पैंगोलिन का नाम हटाया गया है।

चीनी दवाओं में पैंगोलिन का होता है इस्तेमाल
चीनी सरकार समर्थित मीडिया खबर के अनुसार, मंगलवार को चीनी फार्माकोपिया के नए वर्जन में लिखा गया है कि - अब चिकित्सा के लिए जरूरी दवाओं की सूची में पैंगोलिन शामिल नहीं है, और इसका कारण ‘जंगल से मिलने वाले संसाधनों की अत्यधिक खपत’ बताया गया है।

मीडिया का दावा-चीन ने दबाव में लिया फैसला
ब्रिटेन से मिलीरिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि बढ़ते वैश्विक दबाव के आगे चीन ने यह फैसला लिया है और उम्मीद की जा सकती है कि इस जीव केशिकार में भी कमी आएगी। माना जाता है कि दीमक और चींटी खाने वाले इस स्तनपायी जीव की पूरी दुनिया में सबसे अधिक तस्करी होती है और इसकी सभी आठ प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं।

बेहद शर्मीला पैंगोलिन चींटियां खाता है, इसलिए इसे चींटीखोर कहा जाता है।

स्तनधारी जीव हैपैंगोलिन

  • पैंगोलिन एक स्तनधारी जीव है। इसके शरीर पर चमड़ी के ऊपर कैरोटिन की बने शल्क या स्केल्समौजूद होतेहैं जिससे यहअपनी रक्षा करता है। इसे चींटीखोर भी कहते हैं क्योंकि यह चीटिंयांऔर दीमकखाता है।
  • पैंगोलिन के स्केल्सही इसके दुश्मन हैं। इस मासूम और बेहद शर्मीले जीव की शल्कनुमा खाल पारंपरिक चीनी दवाएं बनाने में इस्तेमाल होती है।
  • चीन की चिकित्सा पद्धति में इसके स्केल्स सेयौवन, खूबसूरतीऔर गठिया के इलाज कीदवाएं तैयार की जाती हैं।
  • दक्षिण एशिया के कई देशों में पैंगोलिन के मांस को स्वादिष्ट और खास ताकत देने वाला माना जाता है।
  • चीन में इसकी तस्करी करने वालों पर कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान है।

चीन में पैंगोलिन की मांग क्यों
प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के मुताबिक, पैंगोलिन दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला प्राणी है। एशिया और अफ्रीका के जंगलों से इसे अवैध रूप से पकड़कर इंटरनेशल नेटवर्क के जरियेतस्करी की जाती है। इन्हें खासतौर पर चीन और वियतनाम के बाजारों में बेचा जाता है। इनके शरीर पर मौजूद स्केल्ससे दवाएं तैयार की जाती हैं और बचे हुए मांस को ब्लैक मार्केट में बेचा जाता है।

सिंगापुर में जुलाई 2019 में पैंगोलिन के स्केल्स की एक बड़ी खेप बरामद की गई थी। इनका प्रयोग चमड़ी और गठिया की दवाओं को बनाने में किया जाता है। फोटो साभार : सीएनएन

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ने कहा, यह बड़ा कदम
पैंगोलिन का नाम सूची से हटाए जाने पर हांगकांग में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के निदेशक डेविड ओल्सन ने कहा, "चीन के इस कदम का बड़ाप्रभाव होगा। अगर इस जानवर को वाकई बचाना है, तो यह कदम उठाना जरूरी था।"

बीबीसी से बातचीत में 'सेव पैंगोलिंस' संस्था के पॉल थॉमसन ने इसे बहुत अच्छा कदम बताया है। उनका कहना है कि पैंगोलिन को बचाने के लिए यह एक बेहतरीन खबर है। थॉमसन ने कहा कि "पारंपरिक दवाओं से पैंगोलिन की खाल को हटाने का चीन का कदम गेम चेंजर साबित हो सकता है। हमें इसी दिन का इंतज़ार था।

चीनी दवा कम्पनियों के लिए घटाई गई थी सख्ती
एनिमल वेलफ़ेयर कैंपेन ग्रुप ‘वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन’ की कैथरीन वाइज ने भी पैंगोलिन का नाम हटाने पर खुशी जताते हुए कहा- यह एक बहुत अच्छी खबर है। चीन ने पहले पैंगोलिन को सबसे ऊंचे स्तर कीसुरक्षित प्रजाति माना था लेकिन, बाद में चीनी दवा कंपनियों के दबाव के आगे झुकते हुए नरमी बरती जा रही थी।

पैंगोलिन के कोरोना करियर होने का शक

मई में आईरिसर्च स्टडी में खुद चीनके दो प्रमुखवैज्ञानिककांगपेंग झियाओ, जुन्कियोनग झाई इस नतीजेपर पहुंचे हैं कि कोविड-19 महामारी का Sars-CoV-2 वायरस के पनपने में पैंगोलिन और चमगादड़ दोनों की भूमिका है।

साउथ चाइना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन के शोधकर्ताओं के रिसर्च पेपर में पहली बार अपने दावे के पक्ष में ठोस सबूत दिए हैं। वैज्ञानिकों नेमलयन प्रजाति के पैंगोलिन और 4 विशेष जीन्स पर फोकस करके निष्कर्ष निकाले। उन्हें पैंगोलिन में जो कोरोनावायरस ( पैंगोलिन-CoV) मिला है उसका अमीनो एसिड इंसानों में फैले वायरस के जेनेटिक मटेरियल यानी आरएनए से 100%, 98.6%, 97.8% और 90.7%समान है।

स्पाइक प्रोटीन से मिला क्लू
मलयन पैंगोलिन में मिले वायरस में कोशिकाओं पर आक्रमण करके उन्हें पकड़ने वाला स्पाइक प्रोटीन मिला है वह ठीक वैसा ही जिसका इस्तेमाल कोरोनावायरस इंसानों में कर रहा है। इसे विज्ञान की भाषा में रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन कहा जाता है।

वायरस की कड़ियों को जोड़ने में जीवों की जीनोम सीक्वेंसिंग यानी जेनेटिक मटेरियल को क्रम से लगाकर उसकी तुलना करना सबसे अहम प्रक्रिया है। इस नई स्टडी में इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पैंगोलिन-CoV की संरचना इंसान में फैले नएSARS-CoV-2 और चमगादड़ के Sars-CoV RaTG13 नाम के वायरस के समान है।



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चीन की चिकित्सा पद्धति में पैंगोलिन के स्केल्स से यौवन, खूबसूरती और गठिया के इलाज की दवाएं तैयार की जाती हैं। 


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