pub-5493207025463217 एमपी में बाढ़ ने 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ा; 11 हजार लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंचाए, एयरफोर्स के 3 पायलट ने 300 लोगों की जिंदगी बचाईं - SBEDINEWS

Breaking

Subscribe Us

test banner

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

सोमवार, 31 अगस्त 2020

एमपी में बाढ़ ने 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ा; 11 हजार लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंचाए, एयरफोर्स के 3 पायलट ने 300 लोगों की जिंदगी बचाईं

 

मध्य प्रदेश के 12 जिले भारी बाढ़ से प्रभावित हैं। 454 गांव-कस्बों में लोग बाढ़ से लड़कर जीत रहे हैं और भास्कर के रिपोर्टर भी खामोश नहीं हैं। उन्होंने जोखिम लेकर जल, जमीन और आसमान से अपने पाठकों के लिए जमीनी हकीकत और जीत की कहानियां जुटाई हैं... पढ़ें ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट्स

ऑपरेशन जिंदगी बचाओ

शनिवार दोपहर वायुसेना को प्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का निर्देश मिला। चार हेलिकॉप्टर्स (एमआई-17 वी-5 और एएलएच एमके थ्री ध्रुव) को जिंदगी बचाने के मिशन में लगाया गया। रविवार तड़के 5:30 बजे मिशन शुरू हुआ और 8 घंटे में 300 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचा दिया गया। सबसे पहले बच्चों और महिलाओं को बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू मिशन पर जाने से पहले एक-दूसरे को पीपीई किट पहनाते पायलट और टीम मेंबर्स।

(हेलिकाॅप्टर-1 विंग कमांडर अभिमन्यु सिंह )

'पीपीई किट का ध्यान नहीं रहा, हर बार सैनेटाइज किया'

विंग कमांडर ने बताया, "हम तो शनिवार को ही आ गए थे, लेकिन तब मौसम ने रुकावट पैदा की और हमें मिशन आगे बढ़ाना पड़ा। फिर तय हुआ कि तड़के 4 बजे निकलें। यही किया। हम एक घंटे में प्रभावित इलाकों में पहुंच गए थे, लेकिन बाढ़ में फंसे लोगों को नेविगेट करने में दिक्कत हुई। जैसे ही पहली सही लोकेशन मिली, हमने ऑपरेशन शुरू कर दिया।"

"रायसेन और सीहोर में दो-दो हेलिकॉफ्टर रेस्क्यू में जुटे थे। हम पीपीई किट साथ लाए थे, प्रशासन ने भी करीब 30 किट रखी थीं, लेकिन जब लोगों को बचाने उतरे तो कुछ भी ध्यान नहीं रहा। एक-एक को ऊपर खींचा और फिर खुद को सैनेटाइज कर कीचड़ में उतर गए। लक्ष्य था- बच्चों को सबसे पहले बचाएं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट संजय जॉब और सार्जेंट आके वर्मा मेरे साथ थे।"

(हेलिकाॅप्टर-2 स्क्वाॅड्रन लीडर हिमांशु शर्मा)

'लैंडिंग की जगह नहीं, हवा में रेस्क्यू का रिस्क उठाया'

"रायसेन के पिपरिया गांव में हेलिकॉफ्टर ध्रुव (एलएएच-एमके-थ्री) से हम सुबह 6 बजे पहुंचे। सबसे बड़ी मुश्किल थी कि हेलिकॉफ्टर को लैंड करने की जगह नहीं मिल रही थी। इसलिए, हवा से ही रेस्क्यू किया। जैसे ही लोगों ने हमें देखा तो हाथ जोड़कर खड़े हो गए। सिर झुका दिया। सबसे पहले 60 लाेगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया तो लगा कि देश के लिए कुछ किया है।"

"फ्यूल लेने भोपाल आने और फिर प्रभावित जगहों पर पहुंचने के बीच में जो भी समय मिला, उसमें खाना खाया। हम कोरोना प्रोटोकॉल के तहत रेस्क्यू कर रहे थे, इसमें काफी दिक्कत हुई। मेरे साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रतीक दयानंद और करनदीप सिंह लगातार करीब 7 घंटे काम में जुटे रहे। ऑपरेशन खत्म होने पर ही हमें सुकून मिला।"

(हेलिकाॅप्टर-3 स्क्वाॅड्रन लीडर पात्रो)

'पानी के बीच फंसे लोगों को देखते ही अपनी तकलीफें भूल गए'

"सीहोर के सेमलवाड़ा-बम्होरी में रेस्क्यू कर रहे थे, लेकिन हमारा पूरा फोकस पानी के बढ़ते लेवल पर था। जैसे-जैसे पानी बढ़ रहा था, उससे अंदेशा था कि यहां बने घर कभी भी ढह सकते हैं। मुश्किल में फंसे लोगों की संख्या भी 200 से ज्यादा थी। खराब मौसम और बारिश परेशान कर रही थी, लेकिन जब बाढ़ में फंसे लोगों के चेहरे देखे तो मुश्किलें मन से गायब हो गईं।"

"हमने टीम की तरह काम किया और एक-एक कर लोगों को बाहर निकाला। इस दौरान दो बार फ्यूल लेने के लिए भोपाल आना पड़ा। करीब नौ घंटे में काम खत्म करके भोपाल एयरपोर्ट आ गए। पूरे क्रू ने ना तो खाने तक की परवाह नहीं की। फंसे हुए लोगों को निकालने के बाद भोपाल पहुंचकर खाना खाया।"
(स्टोरी इनपुट : अनिल गुप्ता)

मुख्यमंत्री ने देखी बाढ़ की तबाही, बाढ़ का 20 साल का रिकॉर्ड टूटा, 11 हजार लोग सुरक्षित

सीएम शिवराज सिंह चौहान।

मुख्यमंत्री ने कहा, "मां नर्मदा का ऐसा रौद्र रूप 20 साल बाद देखने को मिला है। नदी के बेसिन में हुई भारी बारिश की वजह से 12 जिलों के 454 गांव बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं, लेकिन जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, सेना और वायुसेना के जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर करीब 11 हजार लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया।"

"देवास, हरदा, सीहोर, होशंगाबाद, रायसेन, विदिशा, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, खंडवा आदि जिलों में बाढ़ का ज्यादा असर हुआ है। अलग-अलग जगहों से 267 लोगों को एयर लिफ्ट किया गया। नर्मदा नदी के लगभग सभी प्रमुख बांध जैसे बरगी, तवा, बारना, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर अपने पूरे स्तर के करीब पहुंच चुके हैं। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पूरी स्थिति बता दी है।"

"शनिवार की पूरी रात खुद कंट्रोल रूम में बैठकर स्थिति पर नजर रखे रहा। यदि बरगी और तवा डैम से पानी नहीं छोड़ते तो वे ओवर फ्लो हो सकते थे। रातों-रात लोगों को बाढ़ से बाहर निकालना मुश्किल भरा ऑपरेशन था, इसलिए रात में ही रक्षामंत्री से बात की। उन्होंने तुरंत सेना को मदद के लिए भेजा। अभी स्थिति नियंत्रण में है, फिर भी पश्चिमी मध्य प्रदेश के सभी जिलों में भारी बारिश होने की आशंका है, इसलिए इन जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
रविवार सुबह 10 बजे हेलिकॉप्टर से ली गई यह तस्वीर नसरुल्लागंज के गांव सातदेव की है। 5000 की आबादी वाला यह गांव टापू बन गया है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Top Ad

Responsive Ads Here